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हिन्दी ब्लॉग – by RC Mishra

श्रीमद्भगवद्गीता । Shrimadbhagvadgita: अध्याय २: श्लोक ३९-४०। निष्काम कर्म

Chapter 2: Verse 39-49 Subject: Desire less Action विषय: निष्काम कर्म एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु।बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि॥२-३९॥This knowledge…

श्रीमद्भगवद्गीता । Shrimadbhagvadgita: अध्याय २: श्लोक ३७-३८ । कर्त्तव्य परायणता का वरदान (की उपलब्धि)

Chapter 2: Verse 37-38 Subject: Bliss of Performing Duty विषय: कर्त्तव्यपरायणता का वरदान हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय…

व्यक्तिगत आक्षेप कब तक?

कुछ लोग हिन्दी चिट्ठाकारी के स्तर को गिराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यह बात साफ़ है कि नारद की कड़ी…

कौन है ये धुरविरोधी ?

>स्वागत >है>आपका>आपको>भी>जानना>है>कि>कौन>है>ये>धु>र>वि>रो>धी>हम>दिखाते>हैं>आपको>कि>ये>है>धुर>विरोधी"सबको पता है-सबको खबर है" पता चला न, क्या कहा, अभी भी नही? तो ई मेल कीजिये न, अरे कहीं, मुझे न कर दीजियेगा,…